MP Assembly Elections 2023: विंध्य जनता पार्टी (VJP) काे निर्वाचन आयोग ने दी मान्यता, मैहर से नारायण त्रिपाठी होंगे उम्मीदवार

ब्रह्मवाक्य/मैहर। MP विधानसभा चुनाव 2023 के लिए नारायण त्रिपाठी ने विंध्य जनता पार्टी (VJP) बना ली है। विंध्य जनता पार्टी को निर्वाचन आयोग ने मान्यता दे दी है। साथ ही चुनाव चिन्ह दो गन्ना और एक किसान दिया है। 20 अक्टूबर को मैहर में आयोजित कार्यकर्ता सम्मलेन में नारायण त्रिपाठी ने चुनाव लड़ने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि हमने किसी भी दल से टिकट नहीं मांगा था।

हाल ही में कुछ दिन पहले भाजपा से त्यागपत्र दिया। मीडिया द्वारा कांग्रेस में जाने के कयास थे। जबकि मैंने कांग्रेस से टिकट मांगी ही नहीं है। हम मैहर को जिला बनवाने के बाद अब अलग विंध्य प्रदेश की मांग करेंगे। किसी दल में रहकर संभव नहीं था। इसीलिए अपने दल से चुनाव लड़ेंगे। साथ ही रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर की 30 सीट में प्रत्याशी उतारेंगे।

नारायण त्रिपाठी लगातार पांच साल से भाजपा में रहकर विकास के लिए खरीखोटी सुनाते थे। वह बागी होकर मैहर को जिला बनाने की मांग पर अड़ थे। 15 महीने की कांग्रेस सरकार में जिला बनाने के लिए कमलनाथ से जुड़ गए। मैहर जिला घोषित भी हुआ, पर सरकार गिर गई। जिससे मैहर जिला मूर्ति रूप नहीं ले पाया। ऐसे में लगातार भाजपा के खिलाफ बयानबाजी कर सितंबर में जिला बनवा लिया।

13 अक्टूबर को भाजपा से दिया था त्याग पत्र
मैहर से चार बार के विधायक नारायण त्रिपाठी ने 13 अक्टूबर को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के नाम पत्र लिखकर प्राथमिक सदस्यता छोड़ दी है। हालांकि रिजाइन देने के कारणों का खुलासा नहीं किया है। त्रिपाठी ने 13 अक्टूबर को दूसरा पत्र मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष के नाम लिखा है। पत्र के माध्यम से मैहर विधायक ने विधानसभा की सदस्यता से त्याग पत्र देने की बात कही है। साथ ही त्यागपत्र स्वीकार करने का निवेदन किया है।

ऐसा रहा नारायण का राजनीतिक सफर
राजनीति के जानकारों ने बताया कि पहली बार समाजवादी पार्टी से 2003 के विधानसभा चुनाव में नारायण त्रिपाठी को सफलता मिली। पर 2008 के चुनाव में भाजपा के मोतीलाल तिवारी से हार गए। ऐसे में 2013 के चुनाव में कांग्रेस का दामन थामकर चुनाव लड़ा और विजयी हुए। पर 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी अजय सिंह राहुल से अनबन हो गई। ऐसे में नारायण ने कांग्रेस छोड़ दी। खुद को अपमानित देख नारायण ने भाजपा की सदस्यता ले ली।

दो वर्ष बाद दिया था विधायकी से त्याग पत्र
गौरतलब है कि नारायण त्रिपाठी ने दो वर्षों तक कांग्रेस के विधायक पद से त्यागपत्र नहीं दिया। अंतत: वर्ष 2016 में मैहर विधानसभा का उपचुनाव हुआ और नारायण त्रिपाठी को जीत मिली। चाैथी बार 2018 के चुनाव में भाजपा से जीत दर्ज कर कमलनाथ से नजदीकियां बढ़ा ली। वे मैहर को जिला घोषित करवाए, पर कांग्रेस की सरकार गिर गई। भाजपा की सरकार बनने पर मैहर को जिला व विंध्य प्रदेश की मांग को लेकर शिवराज सरकार की घेराबंदी शूरू कर दी थी।

Sameeksha mishra

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