MP: भगवान श्रीराम का अनोखा मंदिर जहां उनके पूर्ण स्वरूप की नहीं बल्कि एक भाग की होती है पूजा, जानिए क्या है मान्यता

वनवास के दौरान यहां आये थे भगवान श्रीराम

ब्रह्मवाक्य, विदिशा . मध्यप्रदेश का एक शहर है विदिशा जहां धार्मिक स्थल और मंदिर मौजूद हैं। लेकिन इनमें से एक विशेष स्थान है जिसे चरण तीर्थ के नाम से जाना जाता है। इस प्रमुख धार्मिक स्थल की खास बात यह है कि यहां भगवान राम के पूर्ण स्वरूप की पूजा नहीं होती है, बल्कि सिर्फ भगवान श्रीराम के चरणों की पूजा होती है। यह मंदिर बहुत प्राचीन है। इसका आकार भगवान शंकर की पिंडी के समान है। बताया जाता है कि, यहां पर भगवान श्रीराम के चरण पड़े थे, इसलिए इसका नाम चरण तीर्थ पड़ गया। यहां पर भगवान श्रीराम जी की चरण पादुका भी हैं।

बताया जाता है कि भगवान श्रीराम वनवास के दौरान मध्यप्रदेश के कई इलाकों से होकर गुजरे थे। इस दौरान उनके मार्ग में विदिशा भी आया। वनवास के दौरान श्रीराम पूरे भारतवर्ष में घूमे और साधु-महात्माओं से मिलकर उनका आशीर्वाद लिया। विदिशा के इस स्थान पर च्वयन ॠषि का आश्रम था, जहां वो तपस्या करते थे। श्रीराम च्वयन ऋषि के आश्रम आए थे।

यह मंदिर महाराष्ट्रीयन शैली में बना है। चरणतीर्थ पर दो विशाल शिव मंदिर भी बने हैं। बताया जाता है कि इनमें से एक मंदिर कर निर्माण मराठों के सेनापति और भेलसा के सूबा खांडेराव अप्पाजी ने 1775 में करवाया था। जबकि दूसरे मंदिर को उनकी बहन ने बनवाया था। बताया जाता है कि ग्वालियर स्टेट के सूबेदार अप्पा खंडेराव ने मुगलों के आक्रमण से परेशान विदिशा नगर के लोगों के लिए यहां मंदिर का निर्माण कराया गया था। किवदंति है कि उन्हें इस स्थान पर देवालय का निर्माण कराने के लिय भगवान ने स्वप्न में कहा था।

BM Dwivedi

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